कविता: औंस की बूंद
आज आपके लिए मैं अपने द्वारा लिखी गई एक कविता लेकर आई हूं। सच कहूं तो यह कविता है बहुत छोटी पर इसके मायने उससे कहीं अधिक बड़े हैं। यह एक आशावादी कविता है और आशा है आपको पसंद आएगी।।
औंस की बूंद
आज औंस की एक बूंद मिली
बहुत खुश और खिली-खिली
सोचा मैंने, छूकर उसे
मैं भी पालूं जिंदगी की ताजगी
पूछा मैंने उससे,
क्या है तेरी खुशमिजाजी का राज़
बोली, भूलकर भविष्य की चिंता
जिंदादिली से जी लेती हूं अपना आज ।।
धन्यवाद।

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